कर्म को बदलिए किस्मत का क्या हे वो तो महाकालेश्वर बदल हि देंगे |

Mangal Dosh | Kaal Sarp Dosh | Special Pujas

मंगल भात पूजा
कालसर्प दोष
पितृ दोष
कुंभ विवाह
ऋण मुक्ति
महामृत्युंजय जाप
मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा
नवचंडी और सतचंडी पूजा
मां बगलामुखी जाप
गृह शांति
वास्तु शांति
एवं समस्त मांगलिक कार्य विधि विधान से सम्पन्न करवाये जाते हे
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पंडित पंकज शर्मा

पंडित पंकज शर्मा जी प्रतिष्ठित एवं अनुभवी पंडित जी हैं, जिन्हें वैदिक पूजा-पाठ, अनुष्ठान एवं ज्योतिषीय उपायों में 12 वर्षों का अनुभव है। ये पूर्ण विधि-विधान और श्रद्धा के साथ विभिन्न धार्मिक पूजन एवं अनुष्ठान संपन्न करवाते हैं, जिनमें मंगल दोष पूजा , कालसर्प दोष निवारण पूजा, महामृत्युंजय जाप, दुर्गा सप्तशती पाठ, ग्रह दोष निवारण, मंगल दोष, पितृ दोष, श्रापित दोष, चांडाल दोष निवारण, कुम्भ विवाह, अर्क विवाह, ग्रहण दोष शांति,संतान प्राप्ति अनुष्ठान (सिद्ध जड़ी -बुटी द्वारा ) केंद्र दोष निवारण, कुंडली विश्लेषण, पत्रिका मिलान, वास्तु दोष निवारण, गृह प्रवेश पूजा, विवाह संस्कार एवं व्यापार बाधा निवारण पूजन शामिल हैं। पंडित पंकज शर्मा जी का उद्देश्य लोगों के जीवन की कठिनाइयों को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करना है। समस्याओं को शांति में बदलने का संकल्प लेकर हम आपकी सेवा में सदैव तत्पर हैं।
सम्मानित ज्योतिषाचार्य अवश्य सम्पर्क करे


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PANDIT PANKAJ SHARAMA

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Anushthan

परिवार की सुख शांति के लिए पंडित जी द्वारा अनुष्ठान करवाये जाते हैं

कालसर्प दोष

Kalsarp Dosh

"कालसर्प योग क्या है ?" काल सर्प दोष क्या है? कुंडली में कालसर्प दोष कैसे बनता है और इस योग को कालसर्प योग क्यों कहा जाता है? कालसर्प योग, मूलतः संस्कृति के दो शब्दों से मिलकर बना है जिनका अर्थ भिन्न भिन्न कर्मकांडी विद्वानों ने निकाला है, ये दो शब्द है ‘काल’ एवं ‘सर्प’, काल के भी दो अर्थ है, प्रथम मृत्यु और दूसरा है समय, इसी प्रकार से सर्प शब्द के भी दो अर्थ है, प्रथम है सर्प अर्थात नाग और दूसरा है रेंगना, अब हम अगर दोनों शब्दों को संयुक्त करते है तो चार अर्थ निकलते है प्रथम सर्प द्वारा मृत्यु, दूसरा समय पर नाग का प्रकोप, तीसरा बहुत ही दुर्दशा के साथ जीवन जीना, यही समय का रेंगना, और चौथा है मृत्यु का धीरे धीरे व्यक्ति को अपने निकट बुलाना किन्तु बहुत कष्टों के साथ, इस प्रकार किसी भी अर्थ में यह उस व्यक्ति के लिए शुभ नहीं है जिसकी कुंडली में कालसर्प योग बना हुआ है।


मंगल दोष पूजा

Mangal Dosh Puja

मंगल ग्रह यदि जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में हो तो कुंडली को मांगलिक माना जाता है, ऐसा होने पर ऐसे जातक का विवाह भी मांगलिक स्त्री या पुरुष से ही करना चाहिए| इसी प्रकार शनि देव यदि जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में हो या दृष्टिगत भी हो तो कुंडली में मांगलिक योग का परिहार हो जाता है, सभी मांगलिक कुंडलियो में मांगलिक दोष हो ऐसा जरुरी नहीं होता है, लोग व्यर्थ में मांगलिक योग सुन के भयभीत हो जाते है, जबकि मंगल ग्रह तो शुभ कार्य, भूमि, ऋणहरता एवं फल प्रदान करने वाले देवता है, कुंडली में मंगल जब ख़राब होता है तब इन्सान , कुछ दोगल होजाता है , और यही कारन है की वहा अपने जीवन में अक्सर सफल होता है, एसा इन्सान मोम की तरह पिघल ता रहता है ....


महामृत्युंजय जाप

Mahamrityunjay Jaap

ऊँ हौं जूं सः ऊँ भूर्भुवः स्वः ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌ ऊँ स्वः भुवः भूः ऊँ सः जूं हौं ऊँ ॥ महामृत्युंजय मंत्र जाप विधान वैसे तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप मनुष्य स्वयं भी कर सकता है, जैसे स्नान के समय जब आप जल सर पर डाल रहे हो तब जाप करने से शरीर निरोग रहता है, किसी भी भोज्य या पेय पदार्थ का सेवन करने से पहले इस मंत्र के जाप से उस भोजन का बहुत ही सकारत्मक प्रभाव पड़ता और वह भोजन स्वस्थ प्रद होता है,यही दैनिक जीवन का आधार है, किन्तु किसी मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए आपको महामृत्युंजय मंत्र का जाप किसी विशुद्ध सदाचारी एवं शाकाहारी ब्राह्मण से ही करवाना चाहिए, कुछ विशेष समय के लिए मंत्र जाप की संख्या भी होती है जैसे...


अर्क/कुंभ विवाह

Ark/Kumbh Vivah

पुरूषों के विवाह में आने वाली विलम्ब या दोषों को दूर करने के लिए कन्या का विवाह करने से पूर्व पुरुष का विवाह सूर्य पुत्री से करवाना चाहिए, जो धनुषाकार वृक्ष के रूप में होती है, विवाह के बाद यह विवाह विधि अर्क कहलाती है। विवाह। जिन पुरुषों की कुण्डली में सप्तम भाव, अष्टम शुक्र, सूर्य, सप्तम, द्वादेश, शनि हो, उन पर शनि की युति होती है। यदि वर की कुण्डली में आठ मंगलदोष हों, भावों में मंगल 1,2,4,7,8,12 में हो तो वह दाम्पत्य विलम्ब या वैवाहिक सुखों में संस्कार योग है। ऐसे पुरुषों को अपने माता-पिता के साथ आना चाहिए और एक अर्क के पेड़ से उनका विवाह करना चाहिए। इसके बाद उन्हें किसी लड़की से शादी करनी चाहिए। ताकि बच्ची को कोई नुकसान न हो। कुंभ विवाह जब चंद्र-तारा अनुकूल हों, तब तथा अर्क विवाह शनिवार, रविवार अथवा हस्त नक्षत्र में कराना ऐसा शास्त्रमति है।


संतान गोपाल अनुष्ठान

Santan Gopal Anushthan

भगवान बाल कृष्णा स्वरूप संतान प्राप्ति के लिए विशेष संतान गोपाल अनुष्ठान कर्म संपादित किया जाता है भगवान बालकृष्ण की सेवा के द्वारा शीघ्र ही शुभ संतान की प्राप्ति होती है भगवान कृष्ण ने जिस प्रकार से सभी दुख दरिद्र सुदामा जी का दूर किया था उसी प्रकार भगवान बालकृष्ण अपनी दिव्य अनुकंपा दया दृष्टि से मनुष्य को उनकी सेवा के द्वारा बाल कृष्ण स्वरूप संतान की प्राप्ति होती है|पूर्ण श्रद्धा, विश्वास एवं विधिपूर्वक संपन्न किया गया संतान गोपाल अनुष्ठान दांपत्य जीवन में सुख-शांति, पारिवारिक आनंद तथा संतान प्राप्ति की मंगल कामना को पूर्ण करने वाला अत्यंत पावन एवं फलदायी अनुष्ठान माना जाता है।


नवग्रह जाप

Navgrah Jaap

महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित नवग्रह स्तोत्र का पाठ करने से ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। यह स्तोत्र दुःस्वप्नों का नाश करता है और अतुलनीय ऐश्वर्य और आरोग्य की प्राप्ति कराता है। साथ ही कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत रहेगी और कई शुभ फल प्राप्त होंगे। महर्षि वेदव्यास ने ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति के लिए नवग्रह स्तोत्र की रचना की। भगवान वेदव्यासजी के मुख से प्रकट इस स्तुति को जो भी व्यक्ति एकाग्रचित्त होकर दिन अथवा रात में इसका पाठ करता है, उसके समस्त विघ्न शांत हो जाते हैं। नवग्रह स्तोत्र का पाठ करने से दुःस्वप्नों का भी नाश होता है तथा पाठ करने वाले को अतुलनीय ऐश्वर्य एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है। नवग्रह स्तोत्र का संपूर्ण पाठ करना चाहिए या फिर जिस ग्रह को प्रसन्न करना है, उस ग्रह का वन्दन पृथक रूप से भी किया जा सकता है।


Astrology Consultation

उज्जैन के अनुभवी पंकज शर्मा पंडित जी द्वारा कुंडली परामर्श, कुंडली मिलान एवं विभिन्न दोषों का शास्त्रोक्त विश्लेषण किया जाता है। आपकी जन्म कुंडली के आधार पर उचित मार्गदर्शन, प्रभावी उपाय एवं आवश्यक पूजा-अनुष्ठान की सलाह दी जाती है।

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कालसर्प दोष, मंगल दोष, पितृ दोष आदि के लिए उचित पूजा एवं उपाय।
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Famous Places

महाकालेश्वर मंदिर

श्री महाकालेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित भगवान शिव का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में इसकी गणना होती है। भगवान शिव यहाँ महाकाल के रूप में विराजमान हैं, जिनका अर्थ है काल (समय और मृत्यु) के भी स्वामी। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को स्वयंभू (स्वयं प्रकट) माना जाता है और यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो इसे विशेष बनाता है।

माँ हरसिद्धि मंदिर

माँ हरसिद्धि मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। हिंदू धर्म में इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
माँ हरसिद्धि को माँ दुर्गा का शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि जब भगवान शिव माता सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब इस स्थान पर माता सती की कोहनी गिरी थी। इसी कारण यह स्थान 51 प्रमुख शक्तिपीठों में सम्मिलित माना जाता है।

मंगलनाथ मंदिर

श्री मंगलनाथ मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है। इसे मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है।
यह मंदिर मंगल दोष, कुंडली दोष और नवग्रह संबंधी पूजा के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। श्रद्धालु यहाँ मंगल शांति पूजा और भात पूजा कराने आते हैं।
श्री मंगलनाथ मंदिर धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। महाकाल दर्शन के साथ यहाँ दर्शन करना शुभ माना जाता है।

चिंतामन गणेश मंदिर

श्री चिंतामन गणेश मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन का प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। यह उज्जैन के सबसे पुराने गणेश मंदिरों में से एक माना जाता है।
मान्यता है कि यहाँ विराजमान भगवान चिंतामन गणेश अपने भक्तों की सभी चिंताओं और बाधाओं को दूर करते हैं। इसी कारण इन्हें चिंतामन गणेश कहा जाता है।
यह मंदिर स्वयंभू गणेश प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है और देशभर से श्रद्धालु यहाँ सुख, शांति, सफलता तथा मनोकामना पूर्ति के लिए दर्शन करने आते हैं।

मां बगलामुखी मंदिर

मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा कस्बे में स्थित मां बगलामुखी मंदिर एक प्रसिद्ध विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर है。 यह स्थान तांत्रिक साधनाओं, शत्रुओं पर विजय और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता पाने के लिए भक्तों के बीच गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है |

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